जज ने कहा, बिना जांचे दावे समाज को कमज़ोर बनाते हैं
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भुयान ने मेघालय की University of Science and Technology में बात रखी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि युवाओं और छात्रों के सोचने के तरीके में भी दिखनी चाहिए कि वे तर्क से काम लें। उन्होंने यह भी कहा कि लोग 'हम' और 'वे' की सोच से निकलकर प्रस्तावना में लिखे 'हम' की सोच अपनाएं।
पृष्ठभूमि
संदर्भ: प्रस्तावना भारतीय संविधान का शुरुआती वक्तव्य है, जो 'हम, भारत के लोग' से शुरू होता है। वैज्ञानिक सोच एक मूल्य है जिसे संविधान नागरिकों से विकसित करने की अपेक्षा करता है, यानी किसी बात को आंख मूंदकर मानने के बजाय सबूत के आधार पर परखना।