राजकोषीय घाटा बढ़कर 7.14 लाख करोड़ रुपये हुआ
भारत सरकार का राजकोषीय घाटा अप्रैल से सितंबर के बीच, यानी FY27 की पहली छमाही में, बढ़कर 7.14 लाख करोड़ रुपये हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार सब्सिडी का खर्च तेज़ी से बढ़ा है, जबकि पूंजीगत खर्च भी बढ़ा है। CGA की रिपोर्ट के मुताबिक घाटा पूरे साल के लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
पृष्ठभूमि
संदर्भ: राजकोषीय घाटा वह अंतर है जो सरकार के खर्च और उसकी कमाई के बीच होता है, इसमें उधारी शामिल नहीं होती। पूंजीगत खर्च सड़कों और रेलवे जैसी संपत्तियों पर होता है, जबकि सब्सिडी वे भुगतान हैं जिनसे खाद्य, ईंधन या उर्वरक जैसी चीज़ों की कीमतें कम रहती हैं।
बर्निंग पोटैटो स्कोर: 62%