कोयंबटूर के एक छात्र की मौत से स्कूलों में जातिगत उत्पीड़न का मुद्दा उठा
कोयंबटूर में कक्षा XI के एक छात्र ने सहपाठियों और एक शिक्षक द्वारा किए गए जातिगत उत्पीड़न के बाद अपनी जान दे दी। इस मामले ने फिर से चिंता पैदा की है कि दशकों के सामाजिक सुधार के बावजूद तमिलनाडु के स्कूलों में जाति अब भी छात्रों को बाँटती है। यह कहानी देखती है कि जातिगत भेदभाव छात्रों की रोज़ की ज़िंदगी को कैसे प्रभावित करता है।
पृष्ठभूमि
संदर्भ: तमिलनाडु में सामाजिक सुधार के आंदोलनों का लंबा इतिहास रहा है, जिनका मकसद जातिगत भेदभाव खत्म करना था। स्कूल सुरक्षित जगह होने चाहिए, इसलिए ऐसे मामले यह सवाल उठाते हैं कि शिक्षक और संस्थान धमकाने की घटनाओं पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।