रैंक-आधारित NEET-PG योजना पर डॉक्टरों को संदेह
डॉक्टरों का कहना है कि NEET-PG और NEET-SS को रैंक-आधारित प्रणाली में बदलने से मेडिकल प्रशिक्षण की गहरी समस्याएं हल नहीं होंगी। हाल की एक बैठक में हितधारकों ने ऊंची फीस, कम स्टाइपेंड और अनिवार्य बॉन्ड का मुद्दा उठाया। सरकार ने राज्य स्तर की समस्याओं की ओर इशारा किया।
पृष्ठभूमि
संदर्भ: NEET-PG स्नातकोत्तर मेडिकल कोर्स के लिए राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है, और NEET-SS सुपर-स्पेशियलिटी कोर्स के लिए है। स्टाइपेंड वह मासिक राशि है जो प्रशिक्षु डॉक्टरों को मिलती है, और अनिवार्य बॉन्ड के तहत स्नातकों को पढ़ाई के बाद तय अवधि तक सेवा देनी होती है।