सुप्रीम कोर्ट ने मुक्त कराए गए बंधुआ मज़दूरों के पुनर्वास पर ज़ोर दिया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बंधुआ मज़दूरों को छुड़ाना अकेले काफ़ी नहीं है। उसने अधिकारियों को आदेश दिया है कि छुड़ाए गए लोगों को तय समय-सीमा में आर्थिक मदद दी जाए और उन्हें अपनी ज़िंदगी ठीक से दोबारा शुरू करने में सहायता की जाए। पीठ ने बंधुआ मज़दूरी खत्म करने को सरकार और अधिकारियों की एक बार का काम नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली ज़िम्मेदारी बताया।
पृष्ठभूमि
संदर्भ: बंधुआ मज़दूरी का मतलब है कि लोग कर्ज़ चुकाने के लिए ज़बरदस्ती काम करते हैं, और भारत में 1976 से इस पर रोक है। छुड़ाए गए कई मज़दूर काम और पैसे के बिना फिर से गरीबी में फँस जाते हैं, इसी वजह से अब अदालतें लंबे समय के पुनर्वास पर ज़ोर देती हैं।